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क्लासिक बॉलीवुड फिल्मों के अभिनेता देवानंद की 100वीं जयंती पर उनके फैंस ने किया उन्हें याद…..

बॉलीवुड इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम जो सदा याद किया जाएगा वो कोई और नहीं बल्कि देवानंद साहब हैं जिनकी इस बार 100वां जन्मदिन मनाया जा रहा हैं भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों के अभिनेता देवानंद को पूरा देश दिल से चाहता है उनकी फिल्मों से लेकर गानों तक के फैंस आज भी दिल से उन्हे याद करते हैं तभी तो इस बार उनके 100वें जन्मदिवस पर 23 और 24 सितंबर को दो दिन का एक फिल्म महोत्सव का आयोजन भी किया गया था। इस फिल्म महोत्सव में देव आनंद की चार फिल्में ‘सीआईडी’, ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ पूरे भारत के 30 शहरों और 55 सिनेमाघरों में लगाई गई थीं।देव आनंद ने 1946 में “हम एक हैं” से अभिनेता के रूप में अपनी शुरुआत की। 1947 में जब उनकी फिल्म “जिद्दी” रिलीज हुई तब तक वह सुपरस्टार बन चुके थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी देव आनंद ने ‘पेइंग गेस्ट’, ‘बाजी’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘सीआईडी’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘अमीर गरीब’, ‘वारंट’, ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसी अनगिनत हिट फिल्में दीं।


हिंदी सिनेमा में तकरीबन छह दशक तक दर्शकों पर अपनी अदाकारी और स्टाइल का जादू बिखेरने वाले सदाबहार अभिनेता देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को पंजाब के गुरदासपुर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। देव आनंद का असली नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था। 1943 में अपने सपनों को साकार करने के लिए जब वह मुंबई पहुंचे तब उनके पास मात्र 30 रुपए थे और रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। तब देवानंद को पहली नौकरी मिलिट्री सेंसर ऑफिस में एक लिपिक के तौर पर मिली ,जहा उन्हें सैनिको द्वारा लिखी चिट्ठियों को उनके परिवार के लोगों को पढकर सुनाना पड़ता था एक वर्ष नौकरी करने के बाद और अपने भाई चेतन आनन्द के साथ 1943 में मुम्बई चले गये | चेतन आनन्द के साथ देव भी भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा से जुड़ गये तभी तो उन्हें फिल्मो में लाने का श्रेय उनके बड़े भाई चेतन आनन्द को जाता है और गायक बनने का सपना लेकर मुम्बई पहुचे देव आनन्द अभिनेता बन गये | देवानंद ने एक हिट शो इंटरव्यू विद सिम्मी ग्रेवाल से बातचीत के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ यानी लव लाइफ पर बात करते हुए कहा था कि सुरैया की नानी को हमारी प्रेम कहानी पसंद नहीं आई थी उनके घर में उनकी नानी की इजाजत के बगैर कुछ नहीं होता था, जिसके कारण बाद में सुरैया और देव आनंद अलग हो गए थे। उन्होंने कहा, सुरैया एक मुस्लिम परिवार से थीं और मैं हिंदू परिवार से था।

अजीबोगरीब हालातों में की देवानंद ने शादी..

फिल्मों में काम करने के दौरान देव आनंद की मुलाकात अभिनेत्री कल्पना से हुई। कल्पना उस समय एक फेमस एक्ट्रेस थीं साथ ही उन्होंने मिस शिमला का खिताब भी जीता था। साल 1954 में उन्होंने फिल्म टैक्सी ड्राइवर में देव आनंद के साथ काम किया था।फिल्म के सेट पर ही दोनों के प्यार की शुरुआत हो गई थी दोनों ने देर न करते हुए एक दिन लंच ब्रेक में शादी कर ली। अपने जीवन के आखिरी दिनों तक कल्पना कार्तिक, देव आनंद के साथ ही रहीं। कल्पना ने सिर्फ 5 फिल्मों में काम किया और इन पांच फिल्मों में देव ही उनके हीरो थे। देव आनंद और कल्पना ने आंधियां, हाउस नंबर 44, टैक्सी ड्राइवर, नौ दो ग्यारह जैसी फिल्मों में साथ काम किया था।
देव आनंद ने जब दुनिया को कहा अलविदा:—
अपने चाहने वालों को हमेशा खुश देखने की हसरत ही एक वजह थी जो देवानंद साहब को अपने आखिरी समय में देश से दूर ले गई। देवानंद नहीं चाहते थे कि भारत में उनके अपने लोग उनके फैंस उनको ऐसे देखें इसलिए उन्होंने जिंदगी के आखिरी पल लंदन में बिताए। और एक दिन क्लासिक फिल्म के बेहतरीन अभिनेता का लन्दन में दिल का दौरा पड़ने से 3 दिसम्बर 2011 को 88 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई लेकिन उनका नाम बॉलीवुड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में सदैव लिखा रहेगा।
देवानंद की दीवानगी….


बॉलीवुड में कितने ही कलाकार आए और चले गए लेकिन शायद ही कोई लीजेंड एक्टर देव आनंद को टक्कर दे पाया। वो अपने दौर के बेहतरीन एक्टर्स में से एक थे। यही नहीं, देव आनंद की दीवानगी लोगों के सिर चढ़ कर बोलती थी। दर्शक उनकी एक झलक पाने के लिए बेरकरार रहते थे उनके हर एक अंदाज़ के दीवाने थे लोग वो जिस तरह से बातें करते , जिस तरह का उनका कपड़े पहनने का स्टाइल था लोग उनके कायल बनते जा रहे थे ।अपने जमाने में देव साहब फैशन आइकन माने जाते थे फ़िल्मों से लेकर लुक्स तक हर चीज़ में देव साहब का जलवा बरकरार था। अभिनय के अंदाज के अलावा एक और चीज़ थी जिस वजह से वो सुर्खियों में रहे वो था उनका काला कोट। देव साहब अकसर सफ़ेद शर्ट के साथ काला कोट पहनते थे और ब्लैक कोट में जो भी उन्हें देखता बस देखता ही रह जाता। उनकी ऐसी मनमोहनी छवि देखकर लड़कियां उन्हें पागल हो जाती थीं उनके लिए कुछ भी कर गुजरने की कोशिश करती थीं। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि कई लड़कियों ने इस काले कोट के कारण सुसाइड करने की कोशिश भी की उन्हें काले कपड़ों में देखने के लिए लड़कियां अपनी छत से ही कूद पड़ती थीं शायद ही इतिहास में किसी अभिनेता के किसी लुक को दीवानगी की इतनी हद तक प्यार मिला हो। देवानंद के काले कोट में लड़कियों की ऐसी दीवानगी देखकर हाई कोर्ट को इस मामले में दखल देना पड़ा और न्यायालय द्वारा देव आनंद के काले रंग के सूट पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऐसा पहली बार हुआ था जब न्यायालय को किसी एक्टर के पहनावे के मामले में दखल देना पड़ा हो। आज देवानंद साहब दुनिया छोड़ के चले गए हों लेकिन वो अपने लोगो और फैंस के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे क्योंकि वो सिर्फ अच्छे कलाकार ही नहीं अच्छे इंसान भी थे।

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